छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्त्रीधन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि पत्नी को अपने स्त्रीधन का दावा करने के लिए बिल या रसीद पेश करना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने पति की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें पत्नी के स्त्रीधन सामान को लेकर विवाद था। अदालत ने कहा कि शादी के बाद अक्सर खरीदारी से जुड़े दस्तावेज पति के परिवार के पास रहते हैं। इसलिए केवल दस्तावेजों की अनुपलब्धता के आधार पर पत्नी के अधिकार को नकारा नहीं जा सकता। कोर्ट ने पत्नी के सामान को उसका वैध अधिकार माना। अदालत ने पति को स्त्रीधन वापस करने या दो लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। फैसले में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया। यह निर्णय वैवाहिक विवादों में स्त्रीधन से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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