छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के वनांचलों में पाई जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों को वैश्विक पहचान दिलाने की बड़ी योजना बनाई है। बस्तर, सरगुजा और अन्य वन क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली गिलोय, अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, सफेद मूसली, गुड़मार और जंगली हल्दी अब ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बेची जाएंगी। सरकार का लक्ष्य इन जड़ी-बूटियों का प्रसंस्करण कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है, जिससे स्थानीय आदिवासी समुदायों को रोजगार भी मिलेगा। इस योजना के तहत जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता और ट्रेसेबिलिटी के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया जाएगा। सरकार ने किसानों और वन संग्राहकों को प्रशिक्षण देने, सर्टिफिकेशन और मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक क्षेत्र में एक प्रमुख हब के रूप में उभर सकता है। यह ब्रांड पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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