छत्तीसगढ़ की रूंगटा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने त्वचा कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में अहम शोध किया है। स्कूल ऑफ फार्मेसी की टीम ने चिटोसान से एक खास हाइड्रोजेल तैयार किया है। इस हाइड्रोजेल में त्वचा कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली 5-फ्लुओरोयूरेसिल दवा को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य दवा को सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचाना है। प्रयोगशाला में त्वचा कैंसर की कोशिकाओं पर हाइड्रोजेल का परीक्षण किया गया। परीक्षण में हाइड्रोजेल ने सामान्य 5-फ्लुओरोयूरेसिल की तुलना में बेहतर कैंसररोधी प्रभाव दिखाया। शोध के नतीजे स्थानीय स्तर पर त्वचा कैंसर के उपचार से जुड़ी रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हाइड्रोजेल आधारित प्रणाली दवा को प्रभावित स्थान पर अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद कर सकती है। इससे भविष्य में उपचार की प्रभावशीलता बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं। हालांकि, मौजूदा निष्कर्ष प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित हैं। मानव उपचार में इसके इस्तेमाल से पहले आगे के शोध और परीक्षण की आवश्यकता होगी। शोधकर्ताओं का काम त्वचा कैंसर के लिए स्थानीय और लक्षित दवा वितरण की दिशा में नई संभावना प्रस्तुत करता है। इस उपलब्धि से कैंसर उपचार के क्षेत्र में चिटोसान आधारित हाइड्रोजेल के उपयोग को लेकर उम्मीद बढ़ी है।
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