छत्तीसगढ़ के 13 जिलों में हजारों बुजुर्ग मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में कई मरीजों की आंखों की रोशनी खतरे में पड़ चुकी है। आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण ग्रामीण मरीज समय पर इलाज नहीं करा पा रहे हैं। कई गांवों में स्वास्थ्य जांच दल नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं। सामाजिक संस्थाओं की गतिविधियां भी मुख्यतः शहरी क्षेत्रों तक सीमित बताई जा रही हैं। पिछले वर्ष 1.80 लाख सर्जरी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सरकारी और सहयोगी संस्थाएं केवल 83 हजार से अधिक ऑपरेशन ही कर सकीं। बड़ी संख्या में लोगों ने निजी अस्पतालों में अपने खर्च पर सर्जरी कराई। आरोप है कि निजी अस्पतालों में हुए इन ऑपरेशनों को भी सरकारी उपलब्धि के रूप में रिपोर्ट में शामिल किया गया। कई जिलों में लक्ष्य के मुकाबले सर्जरी का प्रतिशत काफी कम रहा। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में भी अपेक्षित संख्या में ऑपरेशन नहीं हो सके। ग्रामीण इलाकों में कई बुजुर्ग डर, जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता के कारण इलाज से वंचित हैं। कुछ मामलों में मरीजों की स्थिति गंभीर होने के बाद ही प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लंबित सर्जरियों को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और अंधत्व नियंत्रण अभियान की चुनौतियों को उजागर करती है।
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