छत्तीसगढ़ का इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। एशिया के पहले और देश के प्रतिष्ठित कला विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों की रुचि लगातार बढ़ रही है। इस बार 23 देशों के 253 विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है। विश्वविद्यालय में भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोकसंगीत की शिक्षा लेने के लिए दुनिया भर से छात्र आ रहे हैं। यहां ललित कला, पेंटिंग, ग्राफिक्स, थिएटर, कथक और भरतनाट्यम जैसी विधाओं का अध्ययन कराया जाता है। पारंपरिक भारतीय कलाओं को सीखने के लिए विदेशी विद्यार्थियों का आकर्षण बढ़ा है। विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रही है। प्रशासन का कहना है कि विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या संस्थान की उपलब्धियों को दर्शाती है। कला और संस्कृति के क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय भारत की परंपराओं को वैश्विक मंच तक पहुंचा रहा है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और छात्र संख्या बढ़ने की संभावना है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।
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