गर्मी के मौसम में जानवरों की प्यास बुझाने के लिए चेन्नई और आसपास के जिलों में एक अनूठी पहल शुरू की गई है। एक संस्था के ‘वॉटर बाउल प्रोजेक्ट’ के तहत स्वयंसेवक हर सप्ताहांत में सीमेंट के कटोरों को रंगते हैं। इन कटोरों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में रखा जाता है, जहाँ से आवारा जानवर पानी पी सकें। स्वयंसेवकों का कहना है कि तेज गर्मी में कई जानवर प्यास से तड़प रहे होते हैं, और यह छोटा सा प्रयास उनके लिए बड़ी राहत है। अब तक सैकड़ों कटोरे बनाकर वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें से कई स्कूलों, पार्कों और फुटपाथों पर लगाए गए हैं। इस परियोजना में शामिल स्वयंसेवकों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। पेंटिंग के अलावा वे कटोरों की सफाई और रखरखाव भी करते हैं। संस्था का लक्ष्य इस गर्मी में कम से कम 500 नए कटोरे लगाने का है। स्थानीय निवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मानवता और करुणा की एक मिसाल है। यह परियोजना जानवरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और शहर को अधिक जीव-दयालु बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
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