चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) ने मेघालय की सीएमजे यूनिवर्सिटी की विवादित पीएचडी डिग्रियों पर सख्त कार्रवाई की है। पीयू ने इन डिग्रियों के आधार पर नियुक्त हुए 17 शिक्षकों की अस्थायी मंजूरी वापस ले ली है। इस संबंध में 10 जून को सभी संबद्ध कॉलेजों के प्रिंसिपलों को आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। उन्हें 30 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला पिछले 10 सालों से लंबित था और अब कानूनी राय के बाद यह कदम उठाया गया है। पीयू ने वर्ष 2013 में ही इन डिग्रियों की वैधता पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद 2018 में पीयू की एक समिति ने मेघालय जाकर रिकॉर्ड की जांच भी की थी। फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का फैसला सीएमजे यूनिवर्सिटी के विघटन से जुड़ा था, जिससे डिग्रियों पर उठे सवालों की स्थिति नहीं बदली। जांच रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी संदिग्ध शिक्षक ने संबंधित प्राधिकरण से अपनी डिग्री का सत्यापन नहीं कराया। पहचाने गए अधिकांश शिक्षक चंडीगढ़ के निजी कॉलेजों में कार्यरत हैं। इनमें सेक्टर-10 स्थित एक निजी कॉलेज के दो कंप्यूटर साइंस शिक्षक भी शामिल हैं। सक्षम प्राधिकारी ने सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा के बाद इन नियुक्तियों को रद्द करने का यह अंतिम निर्णय लिया है।
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