वैज्ञानिकों ने समय की उत्पत्ति को समझने के लिए 24,000 अति-शीतल परमाणुओं की मदद से एक सूक्ष्म क्वांटम ब्रह्मांड तैयार किया। इस प्रयोग का नेतृत्व भौतिक विज्ञानी जियोवानी बारोंटिनी ने किया। शोध में पूर्ण शून्य तापमान के बेहद करीब बोस-आइंस्टीन संघनन का उपयोग किया गया। इस कृत्रिम प्रणाली में बिग बैंग और बिग क्रंच जैसी घटनाओं के समान परिस्थितियों का अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने एक विशेष एंट्रॉपिक घड़ी के माध्यम से अव्यवस्था में होने वाले प्राकृतिक बदलावों को मापा। परिणामों से संकेत मिला कि समय संभवतः ब्रह्मांड का मूल तत्व नहीं, बल्कि जटिल आंतरिक प्रक्रियाओं से उभरने वाली अवधारणा हो सकता है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि समय का अनुभव परिवर्तन और एंट्रॉपी से जुड़ा हो सकता है। यह निष्कर्ष पारंपरिक भौतिकी की कई धारणाओं को चुनौती देता है। हालांकि शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और इसके निष्कर्षों की आगे पुष्टि की जानी बाकी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रयोग समय और ब्रह्मांड की प्रकृति को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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