थायराइड की दवा हमेशा के लिए नहीं होती। डॉक्टर वैभव गुप्ता के अनुसार अस्थायी सूजन ठीक हो जाने पर दवा की जरूरत कम हो जाती है या बंद भी की जा सकती है। हैशिमोटो जैसी ऑटोइम्यून स्थितियों में हार्मोन रिप्लेसमेंट लेना जरूरी होता है। हाइपरथायराइडिज्म में इलाज बंद करने का लक्ष्य होता है। दवा को अचानक बंद करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए टीएसएच टेस्ट के आधार पर डॉक्टर से परामर्श लें। थायराइड की दवा लेने वाले मरीजों को नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह से ही दवा की खुराक में बदलाव किया जाना चाहिए। दवा को सही से लेने से स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। थायराइड की दवा लेने वाले मरीजों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।
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