राजस्थान के कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत के बाद ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ऑक्सीटोसिन को आमतौर पर ‘लव हार्मोन’ कहा जाता है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल के खतरे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। यह इंजेक्शन प्रसव प्रक्रिया को तेज करने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना उचित निगरानी इसके इस्तेमाल से जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। कोटा की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल निगरानी पर नई बहस छेड़ दी है। ऑक्सीटोसिन का दुरुपयोग पहले से ही डेयरी उद्योग में विवाद का विषय रहा है। आरोप लगते रहे हैं कि गायों से ज्यादा दूध लेने के लिए इस हार्मोन का अमानवीय तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इंसानों में भी इसका अनियंत्रित उपयोग मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। कई वर्षों से इस इंजेक्शन की बिक्री और उपयोग पर निगरानी रखी जा रही है। बावजूद इसके, इसके अवैध और अनियंत्रित इस्तेमाल की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कोटा की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप भी लग रहे हैं। विशेषज्ञों ने सुरक्षित प्रसव प्रक्रिया और दवाओं के नियंत्रित उपयोग की जरूरत पर जोर दिया है। इस मामले ने चिकित्सा व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर भी गंभीर बहस शुरू कर दी है। लोगों में अब यह चिंता बढ़ रही है कि आखिर निगरानी के बावजूद ऐसे खतरनाक प्रयोग कैसे जारी हैं।
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