लखनऊ अग्निकांड के बाद देशभर में बढ़ी सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर, जांजगीर जिला प्रशासन ने भी कमर कस ली है। जिले के सभी 11 नगरीय निकायों में कोचिंग सेंटरों और बहुमंजिला इमारतों का फायर ऑडिट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोचिंग और शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन हो। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राष्ट्रीय भवन संहिता के तहत तय श्रेणियों के अनुसार, भवनों की ऊंचाई के आधार पर फायर सेफ्टी के नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं। 15 मीटर से कम ऊंचे भवनों में अग्निशामक यंत्र और निकास मार्ग, जबकि 15 से 35 मीटर तक के भवनों में फायर अलार्म और वेट राइजर सिस्टम होना आवश्यक है। 35 से 60 मीटर ऊंचे भवनों के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम और रिफ्यूज एरिया अनिवार्य है, वहीं 60 मीटर से अधिक ऊंचाई पर समर्पित कंट्रोल रूम की आवश्यकता है। 15 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों में प्रशिक्षित फायर सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति और दो सीढ़ियों का होना अब अनिवार्य कर दिया गया है। जांजगीर नैला के सीएमओ विक्रम भगत ने बताया कि सर्वे के लिए जल्द ही विशेष टीमें गठित की जाएंगी। सर्वे के दौरान नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित संचालकों और प्रबंधन को नोटिस जारी किया जाएगा। प्रशासन इस अभियान के जरिए भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए तत्पर है।
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