सीन पार्कर ने 250 मिलियन डॉलर (लगभग 2,000 करोड़ रुपये) की पहल से कैंसर अनुसंधान को नई दिशा दी है। उन्होंने अलग-अलग संस्थानों के बीच डेटा साझाकरण में आने वाली रुकावटों को तोड़ दिया है। पार्कर इंस्टीट्यूट ने प्रमुख कैंसर केंद्रों को एकजुट कर एकीकृत डेटा पाइपलाइन बनाई है। इस सहयोगी मॉडल से टार्गेटेड इम्यूनोथेरेपी के विकास में तेजी आई है। पहले अलग-अलग हॉस्पिटल और रिसर्च लैब्स में डेटा फ्रैग्मेंटेड होता था। अब एक ही छत के नीचे सभी की जानकारी एकत्रित होती है, जिससे सिद्धांतों की पुष्टि तेजी से हो पाती है। इससे मरीजों को लाभ पहुंचाने वाली क्लिनिकल डिस्कवरीज को सुव्यवस्थित किया गया है। कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए आशा की नई किरण जगी है। यह पहल मेडिकल रिसर्च में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का बेहतरीन उदाहरण बन गई है। अनुसंधान और उपचार के बीच का अंतर कम करने के लिए यह मॉडल दुनिया भर के लिए एक मिसाल है। सीन पार्कर ने साबित कर दिया कि सहयोग की कमी ही सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे उन्होंने अपने निवेश से हटा दिया। अब अगली पीढ़ी की इम्यूनोथेरेपीज तेजी से मरीजों तक पहुंच सकेंगी। इस अभूतपूर्व कदम से कैंसर अनुसंधान के नियम ही बदल गए हैं।
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