दिल्ली के कुतुब परिसर में स्थित प्रसिद्ध लौह स्तंभ सदियों से लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लगभग 1600 वर्ष पुराना यह स्तंभ आज भी जंग न लगने के कारण वैज्ञानिकों और इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है। माना जाता है कि इसका निर्माण गुप्त काल के दौरान किया गया था। यह स्तंभ प्राचीन भारतीय धातुकर्म कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी विशेष संरचना और निर्माण तकनीक इसे सामान्य लोहे से अलग बनाती है। इसमें फॉस्फोरस की अपेक्षाकृत अधिक मात्रा और सल्फर की कम मात्रा पाई जाती है। समय के साथ इसकी सतह पर एक विशेष सुरक्षात्मक परत विकसित हो गई है। यही परत इसे जंग लगने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैज्ञानिक इस परत को प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में देखते हैं। मौसम और पर्यावरणीय प्रभावों के बावजूद स्तंभ की मजबूती बनी हुई है। यह स्मारक भारत की प्राचीन वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों का प्रतीक माना जाता है। आज भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और शोधकर्ता इसे देखने के लिए कुतुब परिसर पहुंचते हैं।
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