कर्नाटक में सत्ता को लेकर चल रहा राजनीतिक संघर्ष अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही थी। अब पार्टी ने इस विवाद को सुलझाने के लिए एक नया फॉर्मूला तैयार किया है। यह फॉर्मूला काफी हद तक बिहार की राजनीतिक रणनीति से मिलता-जुलता बताया जा रहा है। बिहार में भी पहले सत्ता संतुलन के लिए बड़े बदलाव किए गए थे। इसी तरह कर्नाटक में भी नेतृत्व और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना है। इसके साथ ही उनके बेटे को मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की चर्चा है। इस कदम का उद्देश्य पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व दोनों गुटों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। राज्य की राजनीति में यह फैसला बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में इसके प्रभाव सरकार की स्थिरता पर देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक हलकों में इस समझौते को रणनीतिक कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें पार्टी के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।
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