कर्नाटक की राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर नई बहस छिड़ गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य में आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की मांग उठाई है। उनकी मांग ने कांग्रेस सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस जातिगत जनगणना के मुद्दे को लंबे समय से अपनी राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बनाती रही है। अब इसी मुद्दे के साथ आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। सिद्धारमैया के रुख से सरकार के भीतर मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए भी यह मुद्दा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। आरक्षण की सीमा बढ़ाने के फैसले में कानूनी और संवैधानिक पहलू अहम होंगे। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के लिए सरकार को कई स्तरों पर विचार करना होगा। सिद्धारमैया की मांग सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकती है। कांग्रेस के लिए अलग-अलग समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। जातिगत आंकड़ों के आधार पर आरक्षण का मुद्दा कर्नाटक में पहले से ही संवेदनशील रहा है। विपक्ष इस मांग को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साध सकता है। वहीं कांग्रेस के भीतर भी इस प्रस्ताव पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा। आने वाले समय में सरकार और पार्टी नेतृत्व का रुख इस मुद्दे की दिशा तय करेगा।
Source: Source