जेन ज़ी (1997-2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी) वयस्कता की दहलीज पर लगातार अस्थिरता के दौर से गुज़र रही है। महंगाई, बेरोज़गारी, कोविड-19 महामारी और जलवायु संकट ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को गहरा प्रभावित किया है। इस पीढ़ी के सामने करियर की पारंपरिक परिभाषा चुनौती बन गई है। वे काम के भावनात्मक अर्थ को फिर से परिभाषित करने पर मजबूर हैं। अध्ययन बताते हैं कि जेन ज़ी में बर्नआउट और चिंता के मामले पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक हैं। वे नौकरी में स्थिरता से ज़्यादा मानसिक शांति और जीवन-कार्य संतुलन को प्राथमिकता देते हैं। कई युवा करियर की शुरुआत से पहले ही भविष्य को लेकर निराशा और थकान महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को अब इस पीढ़ी की जरूरतों को समझना होगा। यह बदलाव पूरी दुनिया में कार्य संस्कृति को नया आकार दे रहा है।
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