करनाल की एक अदालत में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमानत लेने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक आरोपी को जमानत दिलाने के लिए अधिवक्ता अंकित कुमार ने फेडरल बैंक की तीन एफडीआर पेश की थीं, जिनमें से जांच के दौरान दो पूरी तरह फर्जी पाई गईं। तीसरी एफडीआर को भी नियमों का उल्लंघन करते हुए मात्र एक सप्ताह के भीतर तुड़वा लिया गया, जबकि इसे ट्रायल पूरा होने तक सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य था। यह मामला एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज चरस तस्करी के आरोपी विजय कुमार की जमानत से जुड़ा है। अदालत के रीडर की शिकायत पर पुलिस ने सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने जमानतदार बनने के बदले में पीड़ित परिवार से बड़ी रकम भी वसूली थी। अधिवक्ता होने के नाते अंकित कुमार को कानूनी प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने अदालत को गुमराह करने का दुस्साहस किया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और सभी संबंधित दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है। अदालत ने इस मामले में एक महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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