विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी नौकरियों में केवल कोडिंग कौशल ही पर्याप्त नहीं रहेगा। कंपनियों को ऐसे पेशेवरों की जरूरत होगी जो संगठन के भीतर छिपे ज्ञान और निर्णयों के पीछे के कारणों को समझ सकें। इस भूमिका को ‘AI आर्कियोलॉजिस्ट’ जैसा नाम दिया जा रहा है, जो तकनीक और आलोचनात्मक सोच का मिश्रण होगा। ये पेशेवर उन अनलिखे कारणों और प्रक्रियाओं को उजागर करेंगे जिनके आधार पर व्यवसायिक निर्णय लिए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में डोमेन विशेषज्ञता और मानवीय निर्णय क्षमता का महत्व और बढ़ेगा। इससे गैर-इंजीनियर पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। कंपनियां AI सिस्टम को बेहतर समझने और लागू करने के लिए ऐसे विशेषज्ञों पर निर्भर हो सकती हैं। यह बदलाव कार्यस्थल पर तकनीक और मानव ज्ञान के संतुलन को मजबूत करेगा। इससे संगठनात्मक निर्णय अधिक पारदर्शी और प्रभावी हो सकते हैं। AI के बढ़ते उपयोग के साथ इस तरह की नई भूमिकाएं तेजी से विकसित होने की संभावना है।
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