ओडिशा की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब यह खुलासा हुआ कि पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से दो अत्यंत महत्वपूर्ण न्यायिक आयोग की रिपोर्टें गायब हो गई हैं। इन फाइलों के गुम होने से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बीजू जनता दल (बीजद) के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। भाजपा ने इसे पिछली सरकार की बड़ी लापरवाही और साक्ष्यों को छिपाने की कोशिश करार दिया है। वहीं, बीजद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है। विपक्ष का आरोप है कि इन रिपोर्टों में संवेदनशील मामले शामिल थे, जिनके रहस्य खुलने के डर से उन्हें गायब किया गया है। दूसरी ओर, सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। इस घटनाक्रम ने ओडिशा की पिछली सरकार के कामकाज और पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर ये फाइलें कहां गईं और इनके पीछे किसका हाथ हो सकता है।
Source: Source