जालंधर जिले को एड्स मुक्त बनाने और संक्रमित मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने सोमवार को सिविल सर्जन कार्यालय में मिशन एड्स सुरक्षा के तहत ओट और आईसीटीसी काउंसलरों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की जल्द कंफर्मेटरी जांच की जाए और उन्हें बिना किसी देरी के एआरटी (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी) इलाज से जोड़ा जाए। मां से बच्चे में नहीं फैलेगा संक्रमण, जीरो ट्रांसमिशन पर जोर ः सिविल सर्जन ने कहा कि इस मुहिम का सबसे संवेदनशील हिस्सा गर्भवती मां से बच्चे में होने वाले एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस-बी के खतरे को रोकना है। विभाग का लक्ष्य जीरो ट्रांसमिशन हासिल करना है ताकि आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे। इस बैठक में जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. वनिंदर रियाड़, जिला टीबी अधिकारी डॉ. परमवीर सिंह, जिला समूह शिक्षा एवं सूचना अधिकारी गुरदीप सिंह और क्लिनिकल सर्विस ऑफिसर दीपक कुमार सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहा। सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने कहा कि इस मिशन का उद्देश्य एक दिसंबर 2026 तक एचआईवी महामारी पर पूरी तरह काबू पाना है। इसके लिए 95:95:99 का फॉर्मूला तय किया गया है। .95% पीड़ित व्यक्तियों को उनकी बीमारी के बारे में जागरूक करना। .95% चिन्हित मरीजों का मुफ्त इलाज (एआरटी) तुरंत शुरू करवाना। 99% इलाज करवा रहे मरीजों के शरीर में वायरस के प्रभाव को बिल्कुल नाममात्र (खत्म) के स्तर पर लाना। नशा करने वालों पर विशेष नजर पंजाब में इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले लोगों में एचआईवी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। डॉक्टरों को आदेश दिए गए हैं कि ऐसे मरीजों के डेटा को बिल्कुल सटीक रखा जाए और इलाज में आने वाली दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए।
Source: Source