ड्राई क्लीनिंग उद्योग की शुरुआत एक अनोखी दुर्घटना से जुड़ी मानी जाती है। बताया जाता है कि 1820 के दशक में फ्रांस में एक नौकर से गलती से तेल के लैम्प का द्रव टेबलक्लॉथ पर गिर गया था। बाद में देखा गया कि उस हिस्से के दाग साफ हो गए थे। इस घटना ने यह संकेत दिया कि पानी के बिना भी कुछ रसायनों से कपड़ों की सफाई की जा सकती है। इसी विचार ने आगे चलकर ड्राई क्लीनिंग उद्योग की नींव रखी। शुरुआती दौर में सफाई के लिए ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन सॉल्वेंट्स का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि ये रसायन काफी खतरनाक माने जाते थे। समय के साथ उद्योग में नई तकनीकों और सुरक्षित रसायनों का विकास हुआ। वर्ष 1928 में कम ज्वलनशील और अधिक सुरक्षित सॉल्वेंट्स आने के बाद ड्राई क्लीनिंग उद्योग में बड़ा बदलाव आया। इससे यह प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और व्यावसायिक रूप से सफल बन गई। आज ड्राई क्लीनिंग आधुनिक कपड़ा देखभाल उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज एक साधारण दुर्घटना से शुरू होकर वैश्विक उद्योग में बदल गई।
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