न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए फुटबॉल मैच ने एक बार फिर ईरान की आंतरिक स्थिति की हकीकत को उजागर कर दिया है। जहाँ टीम का उद्देश्य राष्ट्र को एकजुट करना था, वहीं स्टैंड में मौजूद दर्शकों का व्यवहार कुछ और ही कहानी बयां कर रहा था। मैच के दौरान मैदान पर खेल से कहीं अधिक राजनीतिक तनाव और विभाजन देखने को मिला। बीबीसी की संवाददाता शाइमा खलील ने इस घटनाक्रम को बेहद करीब से देखा और महसूस किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से फुटबॉल का मैदान भी राजनीति से अछूता नहीं रह पाया है। स्टेडियम में मौजूद ईरानी समर्थक दो स्पष्ट गुटों में बंटे नजर आए। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि ईरानी समाज में वैचारिक मतभेद कितने गहरे हो चुके हैं। खिलाड़ियों की कोशिशों के बावजूद आम जनता के बीच की खाई पाटना फिलहाल मुश्किल लग रहा है। राजनीतिक विचारधाराएं अब खेल के मैदान तक पूरी तरह हावी हो चुकी हैं। यह घटना बताती है कि ईरान में खेल और राजनीति का घालमेल किस कदर बढ़ गया है। इस मैच ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की आंतरिक कलह को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर दिया है। लोगों की भावनाओं का यह टकराव वाकई चिंताजनक और विचारणीय है।
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