स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के दोबारा खुलने और ईरान-अमेरिका शांति समझौते की संभावनाओं के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है। यह वही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति होती है। विश्लेषकों के अनुसार, इस मार्ग के खुलने से तेल आपूर्ति बाधाएं कम होंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव घट सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, और यह आपूर्ति इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है। हालिया संघर्ष शुरू होने से पहले खाड़ी क्षेत्र भारत के लगभग 40% कच्चे तेल आयात की आपूर्ति करता था, लेकिन 28 फरवरी के बाद युद्ध और तनाव बढ़ने से इनफ्लो में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ के फिर से सुचारु रूप से खुलने पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को राहत मिल सकती है। इससे आयात लागत स्थिर होने और तेल बाजार में उतार-चढ़ाव कम होने की संभावना है। हालांकि, स्थिति पूरी तरह क्षेत्रीय शांति और समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर निर्भर करेगी। भारत ने इस दौरान अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।
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