हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को बरकरार रखने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए अस्थिर करने वाला हो सकता है। उनके अनुसार, इससे हटाए गए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया का सबसे अधिक बोझ गरीब वर्ग पर पड़ेगा। गोंसाल्वेस ने इसे ऐतिहासिक रूप से पीछे ले जाने वाला कदम बताया। उन्होंने टिप्पणी की कि इससे मतदान का अधिकार सीमित वर्ग तक सिमटने का खतरा बढ़ सकता है। इस फैसले को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। कई विशेषज्ञ इसके प्रभावों को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। मामला चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
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