अमेरिका द्वारा ईरानी कच्चे तेल पर प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी छूट देने के बाद भी भारतीय रिफाइनर इसे खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। छूट की अवधि 21 अगस्त तक सीमित है, जिससे लंबी अवधि की व्यावसायिक योजना बनाना चुनौतीपूर्ण है। भारतीय रिफाइनरों ने पहले ही आने वाले महीनों के लिए अपनी आपूर्ति सुरक्षित कर ली है। भुगतान से जुड़ी जटिलताएं, बैंकिंग और बीमा संबंधी चिंताएं भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बार-बार बदलने की आशंका से कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं। हालांकि भौगोलिक निकटता एक बड़ा फायदा है, लेकिन रिफाइनर फिलहाल तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता का अध्ययन कर रहे हैं। इस दौरान भारत ने रूस और मध्य-पूर्व के देशों से तेल आयात में विविधता लाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी खरीदार पहले से ही ईरान के साथ व्यापार में स्थापित हैं, जिससे उन्हें लाभ मिल सकता है। भारतीय कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) जोखिम और द्वितीयक प्रतिबंधों का डर सबसे महत्वपूर्ण कारक है। जब तक स्थिति में दीर्घकालिक स्पष्टता नहीं आती, तब तक भारी मात्रा में आयात की संभावना कम है। हालांकि, यदि भारी छूट मिलती है, तो कुछ अवसरवादी खरीदारी की जा सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर वापसी की उम्मीद फिलहाल नहीं है।
Source: Source