अमेरिका और ईरान के बीच हालिया हमलों के आदान-प्रदान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों देश शांति के करीब हैं या फिर से युद्ध में फिसल रहे हैं। ताजा घटनाओं में अमेरिका ने ईरानी ड्रोन और बंदर अब्बास में ड्रोन कंट्रोल स्टेशन पर हमले किए हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्ष पूर्ण पैमाने पर युद्ध में वापस जाने में रुचि नहीं रखते हैं। ईरान ने अब तक कोई बड़ा जवाबी हमला नहीं किया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह सीधे टकराव से बचना चाहता है। अमेरिका भी लंबे युद्ध में उलझने के मुकाबले कूटनीति को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं, विशेषकर ओमान और कतर की ओर से। दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। ईरान चाहता है कि प्रतिबंध हटाए जाएं, जबकि अमेरिका परमाणु समझौते को सख्त बनाने पर जोर दे रहा है। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे आकस्मिक टकराव की आशंका बनी है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष गर्मियों के अंत तक एक अंतरिम समझौते पर पहुंच सकते हैं। फिलहाल, स्थिति ‘न युद्ध, न शांति’ की धार पर टिकी है। फैसला आने वाले हफ्तों में संभव है, लेकिन बड़े उलटफेर से इनकार नहीं किया जा सकता।
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