नशा छुड़ाने के नाम पर चल रहे अवैध रिहैब सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोप है कि बिना किसी सरकारी मंजूरी और लाइसेंस के संचालित इस सेंटर में लोगों को इलाज का झांसा देकर मोटी रकम वसूली जा रही थी। इस सेंटर से कुल 15 युवकों को मुक्त कराया गया है। इन सभी को अवैध रूप से वहां बंधक बनाकर रखा गया था। मुक्त कराने के बाद पुलिस ने इनके परिजनों से संपर्क किया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें उनके परिवारों के हवाले कर दिया। यह अवैध सेंटर करीब 3 से 4 महीने पहले ही इस शेडनुमा हॉल में शुरू किया था। थाना लाडोवाल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। जानकारी के मुताबिक एएसआई मनजीत सिंह अपनी टीम के साथ 26 मई को मेन चौक लाडोवाल इलाके में गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग अवैध तरीके से नशा मुक्ति केंद्र चला रहे हैं और लोगों से ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि आरोपी हरविंदर सिंह, अमनदीप सिंह और दमनप्रीत सिंह ने मिलकर हंबड़ां रोड स्थित तनेजा पैलेस के पास और गांव कुतबेवाल गुर्जरों के नजदीक एक शेडनुमा हॉल में गैर-कानूनी ढंग से नशा छुड़ाओ केंद्र खोल रखा था। आरोपियों पर आरोप है कि वे नशे से परेशान लोगों और उनके परिजनों को बेहतर इलाज का भरोसा देकर अपने जाल में फंसाते थे और उनसे हजारों-लाखों रुपए वसूलते थे। 20 हजार तक वसूलते थे पुलिस रिकॉर्ड और एफआईआर के विवरण के अनुसार इस केंद्र में अब तक लगभग 40 से 50 लोगों को इलाज के नाम पर लाया या भर्ती कराया जा चुका था। चूंकि आरोपी हर मरीज के परिवार से 15,000 से 25,000 प्रति महीना वसूल रहे थे, इसलिए पुलिस अब इनके बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
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