प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 जुलाई 2023 को शुरू किए गए सिकलिंग उन्मूलन अभियान में दुर्ग जिले में बड़ी अनियमितता सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि जमीनी स्तर पर बिना कोई जांच किए ही राशन कार्ड और पुरानी सूचियों के आधार पर लोगों के नाम पोर्टल में दर्ज किए जा रहे हैं। 27 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ ने सीएमएचओ को आवेदन देकर इसकी पुष्टि की है। कर्मचारियों ने जिला कार्यक्रम प्रबंधक और जिला स्वास्थ्य अधिकारी पर फर्जी एंट्री के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। भास्कर ने दुर्ग के विभिन्न इलाकों में 100 से अधिक लोगों से बात की, जिनमें से अधिकांश ने बताया कि उनकी कभी सिकलिंग जांच ही नहीं हुई। विभाग के आंकड़े बेहद संदिग्ध हैं – 4 जनवरी 2024 तक जिले में सिर्फ 11,655 लोगों की स्क्रीनिंग हुई थी, जबकि 15 मार्च 2026 तक 11.24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का दावा कर दिया गया। सबसे ज्यादा सवाल निकुम और दुर्ग शहर के आंकड़ों पर उठ रहे हैं, जहां लक्ष्य से अधिक उपलब्धि दिखाई गई है। कर्मचारियों का दावा है कि 1.79 लाख शुगर जांच स्ट्रिप मिली थीं, लेकिन पोर्टल पर 3.10 लाख लोगों की शुगर जांच दिखा दी गई। अधिकारियों ने ‘लक्ष्य पूरा करने’ का दबाव बनाने के आरोपों को सिर्फ ‘गफलत’ बताकर खारिज किया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक भूमिका वर्मा ने कर्मचारियों की चेतावनी को दबाव समझने की बात कही। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने सभी कार्यक्रम तय मानक से चलने की बात कही। राज्य नोडल ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। सिकल सेल छत्तीसगढ़ में एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी है, जिसके उन्मूलन के लिए सटीक स्क्रीनिंग अत्यंत आवश्यक है।
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