राजधानी रायपुर की पॉश कॉलोनियों और सोसायटियों में भीषण जलसंकट खड़ा हो गया है। अधिकांश कॉलोनियों के बोर सूख चुके हैं, और 1000-1200 फीट गहराई तक पानी नहीं मिल रहा। इस कारण हर परिवार का मासिक खर्च 10 से 12 हजार रुपए तक बढ़ गया है। लोग पानी के लिए पूरी तरह निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। एक टैंकर की कीमत 800 रुपए है, लेकिन बढ़ती मांग के चलते कुछ संचालक 1300 रुपए तक वसूल रहे हैं। 10-12 सदस्य वाले परिवारों को हर 3-4 दिन में टैंकर बुलाना पड़ रहा है। वहीं, 5 सदस्य वाले परिवार हर 8-9 दिन में टैंकर मंगा रहे हैं। कचना, सड्डू, दलदल सिवनी, मोवा, सेजबहार, डूंडा और जोरा इलाकों में हालात सबसे खराब हैं। यह संकट मार्च से शुरू होकर जून-जुलाई तक बना रहता है। कई सोसायटियों को 15-20 साल हो गए, लेकिन अब तक निगम की पाइपलाइन नहीं पहुंची है। सड्डू इलाके की 90 फीसदी कॉलोनियों में नलों में पानी की धार बहुत कम है। दो दिन पानी आता है, फिर 2-3 दिन बंद रहता है, और आपूर्ति का कोई तय समय नहीं है। कई इलाकों में निगम के टैंकर भी नहीं पहुंच रहे, जिससे लोगों को निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पीने के पानी के लिए अलग से बोतल और केन खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च और बढ़ गया है। पिछले साल 600 रुपए में मिलने वाला टैंकर अब 850-900 रुपए में मिल पा रहा है। निगम से टैंकर नहीं मिलने पर पार्षद फोन पर सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। लोग मजबूरन पड़ोसियों के साथ मिलकर टैंकर मंगाते हैं ताकि खर्च बांटा जा सके। रायपुर की इन 70 से अधिक कॉलोनियों में रहना अब महंगा और मुश्किल हो गया है।
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