युद्धग्रस्त सीरिया में बचपन बिताने वाले अहमद इब्राहिम अब कृत्रिम अंगों की तकनीक में नई क्रांति लाने की कोशिश कर रहे हैं। महज 10 साल की उम्र में उन्होंने बमबारी में घायल हुए अपने दोस्त के लिए लेगो की मदद से कृत्रिम हाथ बनाने का प्रयास किया था। बचपन के इसी अनुभव ने उन्हें आधुनिक कृत्रिम अंग विकसित करने के लिए प्रेरित किया। अब कनाडा में रह रहे अहमद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से संचालित रोबोटिक हाथ विकसित कर रहे हैं। उनके इस नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें फंडिंग मिली है। अहमद का उद्देश्य ऐसा कृत्रिम हाथ बनाना है, जिसे इस्तेमाल करने वाले लोग अधिक आसानी और बेहतर नियंत्रण के साथ उपयोग कर सकें। उनका स्टार्टअप बेटर बायोनिक्स इस तकनीक को विकसित करने पर काम कर रहा है। परियोजना में उन्नत AI तकनीक और 3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे कृत्रिम हाथों को उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की योजना है। प्रोटोटाइप के परीक्षण के लिए कंपनी ने हैमिल्टन हेल्थ साइंसेज के साथ सहयोग किया है। अहमद का लक्ष्य कृत्रिम अंगों की निर्माण लागत को कम करना भी है। इससे आधुनिक तकनीक वाले कृत्रिम हाथ अधिक लोगों की पहुंच में आ सकेंगे। उनकी पहल तकनीकी नवाचार के साथ दिव्यांग लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Source: Source