पंचकूला में चंडीगढ़ पुलिस की महिला कांस्टेबल सपना यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी पति परविंदर को नियमित जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति एचएस ग्रेवाल की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। आरोपी करीब एक साल छह महीने और 19 दिनों से जेल में बंद था। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मुकदमे की सुनवाई पूरी हुए बिना लंबे समय तक हिरासत में रखना सजा देने जैसा हो सकता है। सपना यादव चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात थीं और अपने पति के साथ मोहाली के नया गांव में रहती थीं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 11 मार्च 2025 को सपना ड्यूटी पर नहीं पहुंचीं और उनका मोबाइल फोन भी बंद था। उनकी सहेली उर्मिला कुमारी को उनकी टोयोटा ग्लैंजा कार पंचकूला में मनसा देवी मंदिर के वीआईपी गेट के पास साकेतड़ी रोड पर लावारिस हालत में मिली। कार की पिछली सीट पर कंबल में लिपटा सपना का शव बरामद हुआ था। मृतका के भाई गौरव की शिकायत पर 12 मार्च 2025 को हत्या का मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में परविंदर पर सपना को प्रताड़ित करने और हत्या के बाद कार में शव छोड़कर फरार होने के आरोप लगाए गए थे। बाद में मामले में साक्ष्य मिटाने से संबंधित कानूनी प्रावधान भी जोड़ा गया। हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते हुए इस सिद्धांत को दोहराया कि जमानत सामान्य नियम है और जेल अपवाद। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोप साबित हो गए हैं या उसे दोषमुक्त कर दिया गया है।
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