कर्नाटक सरकार ने 18 सितंबर 2026 को पहली बार मंगलुरु में विशेष कैबिनेट बैठक आयोजित की। बैठक में तटीय कर्नाटक से जुड़े विकास प्रस्तावों और स्थानीय मांगों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बैठक से पहले तटीय क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों पर ध्यान देने की बात कही थी। सरकार ने बंदरगाह, बुनियादी ढांचे, मत्स्य पालन, पर्यटन और उद्योग से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही। बैठक में तटीय जिलों से संबंधित कई प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। रिपोर्टों के अनुसार, कैबिनेट ने करीब 32,611 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और प्रस्तावों को मंजूरी दी। बैठक में तटीय क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही कुछ मांगों पर भी विचार किया गया। सरकार ने दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में तुलु को अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया। दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर मंगलुरु जिला करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी फैसला हुआ। मंगलुरु में कैबिनेट बैठक आयोजित करने के कदम को आगामी 2028 कर्नाटक विधानसभा चुनाव के संदर्भ में राजनीतिक महत्व वाला कदम माना जा रहा है। दक्षिण कन्नड़ और उडुपी क्षेत्रों में भाजपा तथा आरएसएस के प्रभाव को लेकर लंबे समय से राजनीतिक चर्चा होती रही है। कुछ राजनीतिक विश्लेषणों में कांग्रेस के इस कदम को तटीय क्षेत्र में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा गया है। हालांकि सरकार ने बैठक का मुख्य उद्देश्य तटीय जिलों के विकास और स्थानीय जरूरतों पर निर्णय लेना बताया है। बैठक के बाद सरकार ने तटीय क्षेत्र के लिए कई विकास और प्रशासनिक फैसलों की जानकारी दी।
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