SEBI प्रमुख ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी F&O के सेटलमेंट प्राइस तय करने की व्यवस्था में बदलाव की संभावना जताई है। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा मैकेनिज्म की समीक्षा की जा सकती है। सेटलमेंट प्राइस बाजार में डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के अंतिम मूल्य निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़ा हो सकता है। SEBI बाजार की मौजूदा प्रक्रियाओं और उनके प्रभावों पर लगातार नजर रखता है। दूसरी ओर, SEBI प्रमुख ने CAS सिस्टम को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि CAS सिस्टम को लागू करने के फैसले से पीछे हटने का सवाल नहीं है। CAS से संबंधित व्यवस्था को लेकर नियामक की प्रतिबद्धता बरकरार है। F&O बाजार से जुड़े नियमों में बदलाव निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों को प्रभावित कर सकते हैं। सेटलमेंट प्राइस मैकेनिज्म में किसी भी बदलाव का असर डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर पड़ सकता है। नियामक की ओर से संभावित बदलावों को लेकर आगे की प्रक्रिया और विवरण महत्वपूर्ण होंगे। SEBI का जोर बाजार की प्रक्रियाओं को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाए रखने पर है। F&O सेटलमेंट और CAS सिस्टम से जुड़े ये दोनों मुद्दे पूंजी बाजार के नियमन के लिहाज से अहम हैं। आगे होने वाले फैसलों से बाजार प्रतिभागियों के लिए नियमों की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
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