आजतक की पड़ताल में देश की कई रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग और जमीनी गतिविधियों की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ऐसे दल हैं जिनके पास कोई सांसद या विधायक नहीं है, फिर भी उन्हें करोड़ों रुपये का चंदा मिला है। गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश में कई दलों के पंजीकृत पतों का रियलिटी चेक किया गया। कुछ जगहों पर कार्यालय बंद मिले या वहां राजनीतिक दल का स्पष्ट बोर्ड नहीं मिला। रिपोर्ट में ऐसे दलों के बैंक खातों में बड़े पैमाने पर चंदे की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। उदाहरण के तौर पर भारतीय नेशनल जनता दल को 2019-20 से 2023-24 के बीच 957 करोड़ रुपये से अधिक की आय दिखाए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में 2023-24 के दौरान कुछ अन्य छोटे दलों को भी सैकड़ों करोड़ रुपये का चंदा मिलने का उल्लेख है। इनमें आम जनमत पार्टी, सत्यवादी रक्षक पार्टी, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी और न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी जैसे नाम शामिल हैं। चुनावी गतिविधियों और प्राप्त धनराशि के बीच अंतर को लेकर रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। ऐसी पार्टियों को चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल यानी RUPP के रूप में बताया गया है। चुनाव सुधार संस्था ADR के आंकड़ों का भी रिपोर्ट में हवाला दिया गया है। इन दलों को मिलने वाले चंदे के स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता का सवाल उठाया गया है। हालांकि, चंदे में किसी गैरकानूनी गतिविधि का निष्कर्ष केवल इन तथ्यों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता और संबंधित दलों के जवाब भी महत्वपूर्ण हैं।
Source: Source