भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 27 पैसे कमजोर हुआ। यह लगातार दूसरे दिन रुपये में गिरावट रही। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से भी रुपये पर दबाव पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार और RBI के हस्तक्षेप जैसे सहायक कारक इस दबाव को पूरी तरह कम नहीं कर सके। बाजार में निवेशकों की नजर अब अमेरिका और भारत के महंगाई आंकड़ों पर है। इन आंकड़ों से बाजार की आगे की दिशा प्रभावित हो सकती है। घरेलू शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों की ओर से शेयरों की बिक्री का असर बाजार पर पड़ा। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी निकासी को रुपये के लिए प्रमुख दबाव वाले कारकों में गिना जा रहा है। निवेशक वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं।
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