भारत को पूर्व और पश्चिम के बीच संतुलन बनाने वाली भूमिका में देखा गया है। विश्लेषण के अनुसार भारत के पास अलग-अलग पक्षों के बीच संवाद की संभावना है। BRICS में ईरान के मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कोशिश की जा सकती है। भारत इस प्रक्रिया में मध्यस्थ भूमिका निभा सकता है। लेख में भारत की कूटनीतिक स्थिति को इसके लिए उपयुक्त बताया गया है। इसमें BRICS के भीतर ईरान से जुड़े मुद्दे पर सहमति बनाने की बात कही गई है। भारत पहले भी बहुपक्षीय मंचों पर अलग-अलग रुख रखने वाले देशों के बीच संवाद की कोशिश कर चुका है। लेख में G20 में यूक्रेन मुद्दे पर बनी सहमति का उदाहरण दिया गया है। इस उदाहरण को भारत की कूटनीतिक क्षमता से जोड़ा गया है। BRICS में ईरान को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं। ऐसे में भारत की संतुलित स्थिति बातचीत का आधार बन सकती है। लेख का मुख्य तर्क BRICS में सहमति बनाने के लिए भारत की संभावित भूमिका पर केंद्रित है।
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