छत्तीसगढ़ के करीब 10 लाख बच्चों को इस साल आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-स्कूल किट नहीं मिल पाने की आशंका है। प्रदेश के 52 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए किट खरीदने का बजट अगस्त तक जारी नहीं हुआ है। बजट नहीं मिलने के कारण अब तक टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है। टेंडर, खरीदी और आपूर्ति में लगने वाले समय को देखते हुए इस सत्र में किट पहुंचना मुश्किल माना जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह साल के बच्चों को पोषण के साथ स्कूल के लिए तैयार किया जाता है। बच्चों को खेल-खेल में अक्षर, संख्या, रंग, आकार और अलग-अलग वस्तुओं की पहचान सिखाई जाती है। सामान्य प्री-स्कूल किट में एक केंद्र के लिए करीब 19 तरह की शिक्षण और खेल सामग्री होती है। इसमें पजल, बिल्डिंग ब्लॉक, गुड़िया, खिलौने, किचन व डॉक्टर सेट और हैंड पपेट जैसी सामग्री शामिल रहती है। बच्चों को गिनती और अक्षर ज्ञान सिखाने के लिए काउंटिंग फ्रेम, स्लेट और क्रेयॉन भी दिए जाते हैं। शारीरिक गतिविधियों के लिए बैट-बॉल, रबर रिंग, फ्लाइंग डिस्क और लट्टू जैसी सामग्री होती है। एक किट की औसत कीमत करीब 2,000 से 2,500 रुपए बताई गई है। सामान्य तौर पर अप्रैल-मई में टेंडर के बाद जून तक खरीदी पूरी कर जुलाई में नए सत्र के साथ किट पहुंचाई जाती है। इस बार प्रक्रिया शुरू नहीं होने से बच्चों की कई गतिविधियां बिना विभागीय शिक्षण सामग्री के करानी पड़ सकती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अनुसार पुरानी सामग्री लगातार इस्तेमाल से टूट या खराब हो जाती है, इसलिए हर साल नई किट जरूरी है।
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