नर्मदापुरम में काले हिरणों की मौत से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि वन्यप्राणियों की मौत के बावजूद विभाग ने लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की। कथित तौर पर करीब सात महीने तक मामले पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इस दौरान काले हिरणों की हालत लगातार खराब होती रही। वन्यप्राणियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले के सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यशैली चर्चा में आ गई है। मीडिया के सवालों के बाद अधिकारियों की सक्रियता बढ़ने का आरोप है। घटना ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर नाराजगी सामने आ रही है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग उठ सकती है। काले हिरणों की मौत के कारणों और विभागीय लापरवाही की जांच की जरूरत बताई जा रही है। पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
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