भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी50 के अलग-अलग रुख को लेकर चर्चा हुई। दोनों प्रमुख सूचकांकों में यह अंतर नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था के कारण दिखाई दिया। नई प्रणाली में कीमत निर्धारण के लिए वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस की जगह नया तंत्र लागू किया गया है। इस प्रक्रिया के तहत क्लोजिंग कीमत इक्विलिब्रियम प्राइस मैकेनिज्म से तय की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिकतम ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर अंतिम कीमत निर्धारित करना है। एक्सचेंज ने स्पष्ट किया कि सेंसेक्स और निफ्टी50 की चाल में अंतर कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं थी। यह नई क्लोजिंग प्रक्रिया का सामान्य परिणाम था। पहली बार लागू हुई इस ऑक्शन व्यवस्था में बाजार प्रतिभागियों ने अच्छी भागीदारी दिखाई। नई प्रणाली से बाजार में बेहतर मूल्य खोज प्रक्रिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। निवेशकों को इस बदलाव के कारण सूचकांकों के अलग-अलग प्रदर्शन को समझने की जरूरत है।
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