भारत के छह जिलों के 108 स्कूलों में 6,168 छात्रों पर एक अध्ययन किया गया। यह रिसर्च विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के आधार पर की गई। अध्ययन में पाया गया कि करीब 20 प्रतिशत छात्र भविष्य में नशे की लत के जोखिम में हो सकते हैं। शोध के अनुसार गुवाहाटी के छात्रों में यह जोखिम सबसे अधिक दर्ज किया गया। वहीं नागपुर और पुडुचेरी के छात्रों में जोखिम सबसे कम पाया गया। अध्ययन में छात्रों के व्यवहार और जोखिम कारकों का विश्लेषण किया गया। शोध के निष्कर्ष युवाओं में नशे की रोकथाम के लिए समय रहते हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर देते हैं। विशेषज्ञों ने स्कूलों और परिवारों की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। जागरूकता कार्यक्रम और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने की सिफारिश की गई है। शोध के निष्कर्ष नीति निर्माताओं और शिक्षा संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माने जा रहे हैं।
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