इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप का दावा करने वाली एक महिला को भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया है। महिला ने फैमिली कोर्ट द्वारा उसकी याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि महिला विवाह या लिव-इन संबंध का पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। दूसरी ओर, संबंधित व्यक्ति ने भी किसी वैवाहिक या लिव-इन संबंध से इनकार किया था। अदालत ने माना कि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में भरण-पोषण का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस फैसले का नाबालिग बेटे के भरण-पोषण के अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बच्चे के संबंध में पूर्व में दिए गए आदेश यथावत रहेंगे। अदालत का निर्णय मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर दिया गया है। यह फैसला विशेष रूप से महिला के भरण-पोषण के दावे तक सीमित है।
Source: Source