NEET पेपर लीक के बाद छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उनका गुस्सा सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के रूप में सामने आया। समय के साथ यह आंदोलन लगातार बड़ा होता गया। कई स्थानों पर छात्रों ने न्याय की मांग उठाई। बाद में विभिन्न राजनीतिक दल भी इस मुद्दे से जुड़ गए। दूसरे संगठनों ने भी आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इससे पूरे मामले ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया। सियासी खींचतान के बीच मूल मुद्दा पीछे छूटता नजर आया। सबसे अधिक प्रभावित वे छात्र रहे जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे। उनका मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष जांच और न्याय प्राप्त करना था। छात्रों की मांग थी कि उनकी मेहनत और विश्वास की रक्षा की जाए। यह मामला शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
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