एक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। छात्र ने दावा किया कि इंटर्नशिप के दौरान मैनेजर ने उसे प्री-प्लेसमेंट ऑफर मिलने का भरोसा दिया था। उसे कई बार बताया गया कि उसका PPO लगभग तय है। इंटर्नशिप के दौरान छात्र को लगातार सकारात्मक फीडबैक भी मिलता रहा। इस वजह से उसे करीब 35 लाख रुपये सालाना पैकेज मिलने की उम्मीद थी। लेकिन इंटर्नशिप खत्म होने से केवल दो दिन पहले उसका ऑफर रद्द हो गया। छात्र ने बताया कि इस फैसले से उसे बड़ा झटका लगा। अब वह करीब 6 लाख रुपये के अन्य ऑफर पर विचार कर रहा है। इस घटना ने नौकरी की अनिश्चितताओं और मौखिक आश्वासनों पर निर्भरता को लेकर चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया यूजर्स ने छात्र के अनुभव पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं। कई लोगों ने करियर फैसलों में लिखित पुष्टि के महत्व पर जोर दिया है।
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