छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में डॉक्टर, पुलिसकर्मी और कर्मचारियों समेत 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार कथित एडवोकेट डायमंड गैंग मौत की सूचना मिलते ही सक्रिय हो जाता था। गिरोह पर सामान्य मौतों को सर्पदंश बताकर सरकारी मुआवजा हासिल करने का आरोप है। जांच में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पटवारी प्रतिवेदन और अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। आरोप है कि करीब 1 से 1.5 लाख रुपये लेकर मामलों को आगे बढ़ाने की सेटिंग की जाती थी। पुलिस ने तहसील कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई लोगों की भूमिका की जांच की है। सिम्स से लेकर तहसील तक कथित नेटवर्क की परतें खंगाली जा रही हैं। पुलिस ने कई ठिकानों पर दबिश देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि घोटाले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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