लाइका नाम की एक आवारा कुतिया ने 1957 में इतिहास रच दिया, जब वह सोवियत संघ के स्पुतनिक-2 यान से पृथ्वी की कक्षा में जाने वाला पहला जीवित प्राणी बनी। हालांकि इस मिशन को जल्दबाजी में तैयार किया गया था और इसमें लाइका को वापस लाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। शुरुआत में सोवियत अधिकारियों ने दावा किया था कि लाइका कई दिनों तक जीवित रही और फिर शांतिपूर्वक उसकी मृत्यु हुई। बाद में एक वैज्ञानिक ने खुलासा किया कि तकनीकी खराबी के कारण उसकी मौत कुछ ही घंटों में हो गई थी। लाइका के मिशन ने अंतरिक्ष अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया। इस घटना ने अमेरिका को भी अपने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को तेजी से विकसित करने के लिए प्रेरित किया। आज भी लाइका को अंतरिक्ष इतिहास के सबसे यादगार और भावनात्मक अध्यायों में से एक माना जाता है।
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