एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद का 1.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। कच्चे तेल और अन्य जिंसों की बढ़ती कीमतों को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है। जून महीने में वस्तुओं के आयात में निर्यात की तुलना में अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इससे व्यापार घाटा और बढ़ गया है। इसी अवधि में पेट्रोलियम निर्यात में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। सेवा क्षेत्र का अधिशेष घटा है, हालांकि यह अभी भी बाहरी खाते को सहारा दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के आयात बिल को प्रभावित कर सकता है। बढ़ता चालू खाता घाटा देश की बाहरी आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल सकता है। सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में वैश्विक बाजार की स्थिति भारत के बाहरी संतुलन के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
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