लगभग 2 अरब वर्ष पहले अफ्रीकी देश गैबॉन के ओक्लो क्षेत्र में पृथ्वी का अब तक ज्ञात एकमात्र प्राकृतिक परमाणु रिएक्टर सक्रिय था। यह रिएक्टर पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बना और संचालित हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार यह लाखों वर्षों तक रुक-रुककर चक्रीय तरीके से कार्य करता रहा। भूजल ने न्यूट्रॉन की गति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण वहां लगातार परमाणु विखंडन की प्रक्रिया संभव हो सकी। वर्ष 1972 में वैज्ञानिकों ने असामान्य समस्थानिक अनुपात का पता लगाया। विस्तृत जांच के बाद पुष्टि हुई कि यह प्राकृतिक परमाणु विखंडन का परिणाम था। इस खोज ने पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने में नई जानकारी दी। ओक्लो आज भी वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां से प्राप्त जानकारी परमाणु कचरे के सुरक्षित भंडारण के अध्ययन में उपयोगी साबित हो रही है। इसके अलावा यह ग्रहों के विकास और प्राकृतिक परमाणु प्रक्रियाओं को समझने में भी मदद करती है। ओक्लो का उदाहरण दिखाता है कि प्रकृति ने मानव हस्तक्षेप के बिना भी जटिल परमाणु प्रक्रियाएं संचालित की थीं।
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