लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में नव दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव चल रहा है। गुरुवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय श्रीराम कथा में पहुंचे। मुख्यमंत्री ने प्रख्यात संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली, निरंतर विकास के लिए आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री ने कहा, प्रदेशवासियों का सौभाग्य है। महान संत के सान्निध्य में भगवान श्रीराम की कथा सुनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, रामकथा सद्भाव का संदेश देती है। रामकथा संस्कार का संदेश देती है। रामकथा मानवता का संदेश देती है। व्यासपीठ से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री को चिरमिरी में 151 फीट ऊंची भगवान हनुमान जी की भव्य प्रतिमा स्थापना का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने प्रतिमा स्थापना पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ के समक्ष सिर झुकाया। कथा में महाराज ने श्रीराम के आदर्शों का वर्णन किया। धर्म का वर्णन किया। मानवता का वर्णन किया। जीवन मूल्यों के प्रसंग सुनाए। उन्होंने धनुष भंग का जीवंत वर्णन किया। सीता-राम विवाह प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया। महाराज ने बताया, राजा जनक ने स्वयंवर में शर्त रखी थी। शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने वाले से सीता का विवाह तय था। कई राजा उपस्थित रहे। कोई धनुष हिला नहीं सका। विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम आगे बढ़े। सहज भाव से धनुष उठाया। प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष भंग हो गया। जनकपुर जय-जयकार से गूंज उठा। राजा दशरथ बारात लेकर मिथिला पहुंचे। वशिष्ठ के मार्गदर्शन में विवाह संपन्न हुआ। विश्वामित्र के मार्गदर्शन में विवाह संपन्न हुआ। लक्ष्मण-उर्मिला का विवाह हुआ। भरत-मांडवी का विवाह हुआ। शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति का विवाह हुआ। रामकथा सत्य और संयम की प्रेरणा देती है: महाराज महाराज ने कहा, रामकथा सत्य की प्रेरणा देती है। संयम की प्रेरणा देती है। कर्तव्य पालन की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा, बचपन को शुद्ध करो। यौवन को प्रबुद्ध करो। बुढ़ापे को सिद्ध करो। कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मौजूद रहे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मौजूद रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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