उल्हासनगर नगर निगम (UMC) ने अपने संपत्ति कर डेटाबेस को दुरुस्त करने के लिए ‘प्रोजेक्ट मंथन’ शुरू किया है। इस अभियान के दौरान निगम ने लगभग 170 करोड़ रुपये की ऐसी बकाया कर राशि की पहचान की है, जो गैर-मौजूद या गलत तरीके से दर्ज संपत्तियों से जुड़ी है। निगम ने इस समस्या को हल करने के लिए डेटा की गहन जांच की और कई खामियों को उजागर किया है। जांच में 1,121 ‘घोस्ट’ संपत्तियों का पता चला है, जिन पर 116 करोड़ रुपये का बकाया दिखाया जा रहा था। इसके अलावा, 114 दोहरी प्रविष्टियाँ और 50 ऐसी मोबाइल टावर असेसमेंट मिली हैं जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। साथ ही, 163 ऐसी संपत्तियां जो गिर चुकी हैं या ध्वस्त हो चुकी हैं, उनके नाम पर भी 24.3 करोड़ रुपये का कर बकाया दर्ज था। निगम के अधिकारियों ने इस पूरी कवायद को बिना किसी बाहरी एजेंसी की मदद के अपने कर्मचारियों द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य केवल गलत रिकॉर्ड हटाना नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और विश्वसनीय कर डेटाबेस तैयार करना है। निगम का लक्ष्य इस सुधार के जरिए वास्तविक करदाताओं को राहत देना और राजस्व नियोजन में सुधार करना है। आने वाले समय में, निगम इन अपडेट किए गए डेटा के साथ डिजिटल भुगतान और व्हाट्सएप के जरिए बिल भेजने की सुविधा शुरू करने की योजना बना रहा है।
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