पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में स्वदेशी ईंधन के विकास पर ध्यान तेज हो गया है। भारतीय शोधकर्ता कृषि अवशेषों को उपयोगी ईंधन में बदलने की नई तकनीक विकसित कर रहे हैं। यह तकनीक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे पराली जलाने की समस्या में कमी आने की संभावना है, जिससे वायु प्रदूषण भी घटेगा। इस प्रक्रिया से बनने वाला बायोचार मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक है। बेहतर मिट्टी से फसलों की पैदावार बढ़ सकती है। इससे किसानों की आय में भी सुधार होने की उम्मीद है। तकनीक से प्राप्त बायो-ऑयल को पारंपरिक कच्चे तेल के साथ मिलाकर रिफाइनिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। कृषि अपशिष्ट का प्रभावी उपयोग पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगा। यह नवाचार ऊर्जा और कृषि दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
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